21 August 2017 ko hone wale Surya Grahan ka Rashinushar Prabhav aur Grahan hone per Kya rakhe Sawdhaniya?

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 21 अगस्त 2017 को होने वाले सूर्य ग्रहण का राशिनुसार प्रभाव एवं ग्रहण होने पर क्या रखें सावधानियाँ?

 

surya_grahan_2017-1ग्रहण शब्द को सूनते ही हम अपने मन में एक ही सोच का बना लेते है कि इसका हमारे जीवन में नकारात्मक प्रभाव होगा। ग्रहण एक खगोलीय घटना मात्र नहीं हैं एक और जहां इसका वैज्ञानिक महत्व है तो दूसरी और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह एक आध्यात्मिक घटना होती है जिसका जगत के समस्त प्राणियों पर काफी प्रभाव पड़ता है। विशेषकर सूर्य ग्रहण एवं चंद्र ग्रहण का। बता दें कि साल 2017 का पहला सूर्य ग्रहण 26 फरवरी को पड़ा था। इसके बाद दूसरा सूर्य ग्रहण 21 अगस्त को है। इससे दो सप्ताह पहले रक्षाबंधन के दिन खंडग्रास चंद्र ग्रहण था। वहीं 26 फरवरी को हुआ सूर्य ग्रहण के दो सप्ताह पहले साल का पहला चंद्र ग्रहण था। आइये जानते हैं कहां दिखाई देगा यह सूर्य ग्रहण और इस दौरान क्या सावधानियां आपको रखनी चाहिये।

कितने प्रकार का होता है सूर्य ग्रहण-

पूर्ण सूर्य ग्रहण – जब पूर्णत: अंधेरा छाये तो इसका तात्पर्य है कि चंद्रमा ने सूर्य को पूर्ण रूप से ढ़क लिया है इस अवस्था को पूर्ण सूर्यग्रहण कहा जायेगा।
खंड या आंशिक सूर्य ग्रहण – जब चंद्रमा सूर्य को पूर्ण रूप से न ढ़क पाये तो इस अवस्था को खंड ग्रहण कहा जाता है। पृथ्वी के अधिकांश हिस्सों में अक्सर खंड सूर्यग्रहण ही देखने को मिलता है।
वलयाकार सूर्य ग्रहण – वहीं यदि चांद सूरज को इस प्रकार ढके की सूर्य वलयाकार दिखाई दे यानि बीच में से ढका हुआ और उसके किनारों से रोशनी का छल्ला बनता हुआ दिखाई दे तो इस प्रकार के ग्रहण को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है। सूर्यग्रहण की अवधि भी कुछ ही मिनटों के लिये होती है। सूर्य ग्रहण का योग हमेशा अमावस्या के दिन ही बनता है।

सूर्य ग्रहण का राशिनुसार प्रभाव-

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इस बार 21 अगस्त को सूर्य ग्रहण पड़ रहा है। भारतीय समय के मुताबिक यह ग्रहण रात में 9.15 मिनट से शुरु होगा और रात में 2.34 मिनट पर खत्म होगा। भारत में इस दौरान रात रहेगी तो यहां पर कहीं भी सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। बताया जाता है कि भारत में सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा तो इसका असर भी नहीं होगा। हालांकि, कई ज्योतिषियों का कहना है कि बेशक भारत में ग्रहण दिखाई ना दे, लेकिन इसका असर राशियों पर जरूर पड़ेगा और भारत में भी सूतक लगेगा। सूर्य ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले यानि 21 अगस्त को सुबह 11.15 बजे से लग जाएगा। बताया जा रहा है कि यह सूर्य ग्रहण साल 2017 का दूसरा बड़ा ग्रहण है। सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों ही शुभ कार्यों के लिये अशुभ माने जाते हैं। पहला सूर्यग्रहण हालांकि भारत में दिखाई नहीं दिया था अब 21-22 को लगने वाला दूसरा सूर्य ग्रहण भी भारत में नहीं देखा जा सकेगा। जिस कारण यह बड़े स्तर पर भारतीयों को प्रभावित नहीं करेगा। लेकिन 22 अगस्त को जिनके लिये ग्रहण के कारण पीड़ित सूर्य की दशा व अन्य ग्रहों की स्थिति विभिन्न राशियों को जरूर प्रभावित करेगी। एस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्य इस बारे में क्या कहते हैं आइये जानते हैं-
मेष – मेष राशि का स्वामी मंगल कर्क राशि में गोचररत हैं ग्रहण के दिन शुक्र भी इनके साथ होंगे जो कि आपकी राशि से चतुर्थ घर में हैं। सुख भाव में राशि स्वामी के साथ शुक्र के आने से आपके जीवन में सुख संसाधनों की वृद्धि के तो संकेत हैं लेकिन आपकी राशि से सूर्य 5वें घर में विचरण कर रहे हैं जो कि संतान, विद्या व प्रेम का घर माना जाता है। ग्रहण के कारण इस दिन आप प्रेम या घरेलू जीवन को लेकर चिंतित हो सकते हैं साथ ही बच्चों की शिक्षा को लेकर भी आपकी चिंता बढ़ सकती है।
वृषभ – वृषभ राशि का स्वामी शुक्र ग्रहण के दिन ही राशि परिवर्तन कर आपके पराक्रम स्थान में आ रहे हैं। वहीं ग्रहण के दिन सूर्य आपकी राशि से चतुर्थ स्थान यानि सुख भाव में होंगें। आपको इस समय थोड़े अतिरिक्त प्रयास करने पड़ सकते हैं। कामकाज के दबाव से आपके सुख में कमी आ सकती है। यदि आप नया कार्य शुरु करने का विचार कर रहे हैं तो उसमें अपने से बड़ों की सलाह जरूर लें क्योंकि ग्रहण के कारण आपके कार्यों में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।
मिथुन – मिथुन राशि का स्वामी बुध सिंह राशि में सूर्य के साथ ही विचरण कर रहे हैं जिससे आपका राशि स्वामी भी प्रभावित रहेगा। अपनी वाणी में नियंत्रण रखें। बेवजह किसी से बहस न करें अन्यथा इसका अशुभ प्रभाव आपके जीवन पर पड़ सकता है।
कर्क – कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है। धन भाव में सूर्य ग्रहण के कारण आपको आर्थिक रूप से नुक्सान झेलना पड़ सकता है। आपके लिये सलाह है कि इस दिन किसी नई परियोजना में निवेश करने, किसी को कर्ज देने या लेने से बचें। आप में उत्साह की कमी भी हो सकती है। आपके राशि स्वामी इस ग्रहण से प्रभावित हैं इसलिये इस दिन शुभ कार्यों को टालना ही आपके लिये बेहतर रहेगा।
सिंह – राशि स्वामी सूर्य स्वयं इस ग्रहण में पीड़ित हैं क्योंकि ग्रहण आपकी ही राशि में लग रहा है। संभल कर रहें आपके मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा व आत्मसम्मान के लिये यह समय थोड़ा चुनौतिपूर्ण रहने के आसार हैं। मानसिक व शारीरिक तौर पर कुछ परेशानियों का आपको सामना करना पड़ सकता है। इनके कारण दांपत्य या प्रेमजीवन के कुछ छुट-पुट विवाद भी हो सकते हैं। इस दिन धैर्य से काम लें व जितना हो सके प्रात:काल सूर्य देव की आराधना व मंत्रों का जाप करें।
कन्या – कन्या राशि का स्वामी बुध सिंह राशि में सूर्य के साथ विराजमान हैं। 12वें भाव में ग्रहण आपके खर्चों में अचानक वृद्धि होने के संकेत कर रहा है। अपनी वाणी में विनम्रता व संयम रखें। विशेषकर व्यावसायिक साझेदार के साथ किसी भी प्रकार की बहसबाजी या वाद-विवाद न करें अन्यथा तल्ख़ियां बढ़ सकती हैं जिसका प्रभाव आपके कार्य जीवन पर पड़ेगा।
तुला – तुला राशि के स्वामी शुक्र ग्रहण के दिन आपके कर्मक्षेत्र में आ जायेंगें लेकिन लाभ स्थान में ग्रहण लगने से आपको हो सकता है कड़ी मेहनत करने के पश्चात भी अपेक्षित परिणाम न मिलें या फिर यह भी हो सकता है कि आपके किये कराये पर पानी फिर जाये और सारी मेहनत बेकार जाये, इसलिये आपके लिये सलाह है कि पूरी सतर्कता के साथ कार्यों को अंजाम दें।
वृश्चिक – वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल कर्क राशि में गोचररत हैं ग्रहण के दिन शुक्र भी इनके साथ होंगे जो कि आपकी राशि से 9वें घर में हैं। आपकी राशि से दसवें घर में सूर्य ग्रहण का योग बन रहा है जो कि आपके कार्यक्षेत्र को प्रभावित कर सकता है इस समय आपके कार्यों में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। पिता के लिये भी यह समय कष्टदायी हो सकता है। इस दिन यात्रा करने का जोखिम न ही लें तो बेहतर है।
धनु – धनु राशि का स्वामी बृहस्पति कन्या राशि में गोचर कर रहे हैं जो कि आपका कर्म क्षेत्र है। आपकी राशि से 9वें स्थान में सूर्य ग्रहण लगेगा, सूर्य ग्रहण के कारण इस समय आपको केवल अपने कर्म पर ही ध्यान देने की आवश्यकता है, स्वयं पर विश्वास रखें हो सकता है इस समय भाग्य का साथ आपको न मिले। मेहनत करने से घबराएं नहीं उचित मार्गदर्शन भी आपको मिल सकता है बड़े बुजूर्गों या अनुभवी सहकर्मियों की सलाह नजरंदाज न करें।
मकर – मकर के राशि स्वामी शनि वृश्चिक राशि में वक्र होकर गोचर कर रहे हैं। यह सूर्य ग्रहण आपकी राशि से आठवें स्थान में लग रहा है। अष्टम भाव मे ग्रहण होने से यह समय आपकी सेहत में सुधार के संकेत तो कर रहा है लेकिन साथ ही आर्थिक रूप से आपको नुक्सान झेलना पड़ सकता है। अपने धन का उपयोग देखभाल कर करें। अचानक से आपके खर्चों में बढ़ोतरी होने की भी आशंका है। किसी भी जोखिम वाले क्षेत्र में पैसा न लगायें खासकर लॉटरी, जुआ आदि में धन न लगायें। इससे हानि हो सकती है।
कुंभ – कुंभ राशि के स्वामी शनि वृश्चिक राशि में वक्र होकर गोचररत हैं जो कि आपकी राशि से 10वां है जिसे हम कर्म पद मानते हैं। लेकिन सप्तम भाव में ग्रहण लगने से यह समय आपके दांपत्य व प्रेम जीवन के लिये थोड़ा कष्टप्रद रह सकता है। तनाव को कम करने व नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिये भगवान शिव शंकर का मंत्र जाप करें।
मीन – मीन राशि के स्वामी बृहस्पति कन्या राशि में विराजमान है जोकि आपकी राशि से सातवें है और स्पष्ट रूप से देख रहे हैं। किसी प्रकार का बड़ा नुक्सान तो आपको नहीं होगा लेकिन आपकी राशि से छठे भाव में सूर्यग्रहण दोष बन रहा है जिससे रोग व शत्रुओं का भय आपको जरूर सता सकता है। स्वास्थ्य संबंधी खर्चों में बढ़ोतरी हो सकती है साथ ही प्रतिद्वदियों आपके हाथ से कोई बड़ा अवसर छीनने का प्रयास कर सकते हैं जिसे लेकर आप चिंतित हो सकते हैं। बेहतर रहेगा कि धन निवेश संबंधी फैसले सोच समझ कर लें।

सूर्य ग्रहण पर क्या रखें सावधानियां-

एस्ट्रोयोगी ज्योतिषाचार्यों की सलाह है कि ग्रहण काल के समय खाना न खांए न ही कुछ पीयें, प्रभु का स्मरण करते हुए पूजा, जप, दान आदि धार्मिक कार्य करें। इस समय नवग्रहों का दान करना भी लाभकारी रहेगा। जो विद्यार्थी अच्छा परिणाम चाहते हैं वे ग्रहण काल में पढाई शुरु न करें बल्कि ग्रहण के समय से पहले से शुरु कर ग्रहण के दौरान करते रहें तो अच्छा रहेगा। घर में बने पूजास्थल को भी ग्रहण के दौरान ढक कर रखें। ग्रहण से पहले रात्रि भोज में से खाना न ही बचायें तो अच्छा रहेगा। यदि दुध, दही या अन्य तरल पदार्थ बच जांयें तो उनमें तुलसी अथवा कुशा डालकर रखें इससे ग्रहण का प्रभाव उन पर नहीं पड़ेगा। ग्रहण समाप्ति पर पूजा स्थल को साफ कर गंगाजल का छिड़काव करें, देव मूर्ति को भी गंगाजल से स्नान करवायें व तदुपरांत भोग लगायें।

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