Bhismh Pitahmah ka mandir

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दारागंज में स्थित है भीष्म की प्रतिमा

Bhismh Pitamah

प्रयाग के दारागंज मोहल्ले में स्थित गंगा किनारे प्रसिद्ध नागवासुकी मंदिर जिसमें की प्रतिमांए दसवीं शदी की मानी जाती है। मंदिर के द्वार के बाहर एक तरफ सन् 1961 में बाणों की शैय्या पर लेटे महाभारत पुराण के भीष्म पितामह की विशालकाय प्रतिमा एवं मन्दिर की स्थापना की गयी थी। माना जाता है कि यहां भीष्म को मां गंगा स्नान कराने आती थी। भारतीय पौराणिक इतिहास में भीष्म पितामह-जैसा चरित्र दूसरा नहीं। महान वीर, संकल्पशील और धर्म-परायण होते हुए भी उन्होंने जो जीवन जिया, एक गहरे अवसाद की छाया उस पर सदैव पड़ती रही। कुरूवंशी राजकुमारों के पारस्परिक कलह ने उन्हें आजीवन उद्विग्न रखा, लेकिन कोई भी दारूण स्थिति उन्हें कर्तव्य-पथ से कभी विचलित नहीं कर पायी। अपने विलक्षण जीवन के अनेक मोड़ों पर वे हमें आदर्शों के चरम शिखर पर दिखायी देते हैं। पिता के प्रति पुत्र की कैसी भक्ति होनी चाहिए, माता और विमाता के प्रति उसके क्या कर्तव्य हैं, मनुष्यता का आदर्श क्या हो, शास्त्र-अध्ययन, ब्रह्मचर्य और सरल भाव से जीवन के निर्वाह का फल क्या है, समर-क्षेत्र में क्षत्रिय का आदर्श क्या है, यथार्थ वीरता किसे कहते हैं- इस तरह से मनुष्य के मस्तिष्क में मनुष्यता से सम्बन्ध रखनेवाले जितने प्रश्न आ सकते हैं, उन सबका उत्तर भीष्म के जीवन से मिल जाता है। भगवान परशुराम के शिष्य देवव्रत जो कि आगे चलकर उनका नाम भीष्म पितामह पढ़ गया। वे अपने समय के बहुत ही विद्वान व शक्तिशाली पुरूष थे। उन्हें सिर्फ उनके ही गुरू युद्ध में हरा सकते थे। लेकिन इन दोनों के बीच हुआ युद्ध पूर्ण नहीं हो सका और दो अति शक्तिशाली योद्धाओं के लड़ने से होने वाले नुकसान को आंकते हुए इसे भगवान शिव द्वारा रोक दिया गया।

Bhismh Pitamah इन्हें अपनी उस भीष्म प्रतिज्ञा के लिये भी सर्वाधिक जाना जाता है जिसकी वजह से इन्होंने राजा बन सकने के बावजूद आजीवन हस्तिनापुर के सिंहासन के संरक्षक की भूमिका निभाई। इन्होंने आजीवन विवाह नहीं किया व ब्रह्मचारी रहे। इसी प्रतिज्ञा का पालन करते हुए महाभारत में उन्होंने कौरवों की तरफ से युद्ध में भाग लिया था। इन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान था। यह कौरवों के पहले प्रधान सेनापति थे। जो सर्वाधिक दस दिनो तक कौरवों के प्रधान सेनापति रहे थे। महाभारत युद्ध खत्म होने पर इन्होंने गंगा किनारे इच्छा मृत्यु प्राप्त की।

 

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