भूत-प्रेत पीड़ा एवं ऊपरी बाधा के लक्षण तथा बचाव के उपाय

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कई बार ऐसा होता है कि व्‍यक्ति बिना किसी वज‍ह के अस्‍वस्‍थ रहने लगता है। उसे नींद नहीं आती और डरावने सपने आते हैं। लोग मानते हैं कई बार बुरी नजर या फिर प्रेत बाधा के कारण ऐसा हो सकता है। आज हम आपको बता रहे हैं कि कैसे करें इसकी पहचान और किन उपायों से दूर करें ये समस्‍या।

अपनी समस्याओं से निजात पाने के लिए और कष्टों को विभिन्न उपायों के माध्यम से कम करने के लिए प्रायः लोग चौराहे आदि पर लौंग, नींबू, भोजन इत्यादि उतारकर रखते हैं। इन वस्तुओं पर सर्वप्रथम जिसका पैर पड़ता है वह उससे प्रभावित हो जाता है।

भूत-प्रेत, ऊपरी बाधाओं से ग्रसित व्यक्ति के ऊपर से उतारी गई वस्तुएं अक्सर बीच चौराहे पर पाई जाती हैं। कभी-कभी जाने-अनजाने में किसी व्यक्ति का चौराहे पर रखी हुई इन वस्तुओं पर पैर पड़ जाता है अथवा कोई इन्हें लांघकर चल देता है तो वह अस्वस्थ होने लगता है।

ऊपरी चक्कर की पहचान

जब अकारण ही मन उदास होने लगे, मनोस्थिति असामान्य रहे, सिर अक्सर भारी रहने लगे, शरीर पर बहुत बोझ अनुभव हो, आंखें अक्सर लाल हो जाएं, कभी बहुत अधिक एवं कभी बहुत कम भूख लगे, पागलों जैसी व्यक्ति हरकत करने लगे, व्यर्थ में बड़बड़ाना एवं बिना किसी ठोस वजह के बहुत थकान का अनुभव करना, सोते में उठकर चल देना अथवा चौंक जाना, जागृत अवस्था में भी विचित्र दृश्य एवं वस्तुएं दिखना, हमेशा भय का अनुभव करना, सर्प के स्पप्न देखकर डरना, किसी निश्चित समय में कोई निश्चित शारीरिक एवं मानसिक परेशानी अकारण उत्पन्न हो तो यह सब ऊपरी चक्कर के संकेत होते हैं।

उपाय

अपनी सुरक्षा एवं अदृश्य बाधाओं से बचने के लिए हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि,
रात्रि में दूध पीकर एवं खीर खाकर अकेले घर से बाहर न निकलें।

पीपल, बरगद एवं इमली के वृक्ष के नीचे न थूकें तथा न ही अन्य किसी प्रकार से गंदगी करें।

किसी स्थान पर यदि टोटका किया हुआ हो, उस स्थान से बचकर निकलें। उसके ऊपर पैर पड़ना अथवा उसके ऊपर से होकर निकलना परेशानी का कारण बन सकता है।

यदि आपको अशुभ स्वप्न आते हों, तो सिराहने फिटकरी रखकर सोएं।

इत्र लगाकर रात्रि के समय बाहर न जाएं, न ही एकांत में रहें।
रूमाल में अथवा साड़ी के पल्लू में एक कोने में थोड़ी सी सुगन्धित हींग बांधनी चाहिए तथा उसे दिन में एकबार अवश्य सूंघना चाहिए।

जब भी किसी कारण से शमशान में जाना पड़े, तो बाहर निकलकर नीम की पत्तियां अवश्य चबानी चाहिए।

सुरक्षा हेतु मंगलवार के दिन हनुमानजी को चोला चढ़ाना चाहिए तथा सिंदूर की बिंदी भी लगानी चाहिए।

जिस व्यक्ति पर यदि ऊपरी बाधा का प्रभाव हो, उसको अपने शयन कक्ष में मोर पंख इस प्रकार रखना चाहिए कि वे उसे दिखते रहें।

बरगद वृक्ष की लटकी हुई जूटों की गांठ न खोलें। जिस स्थान पर तांत्रिक प्रयोग करने के चिन्ह एवं वस्तुएं हों, उस स्थान से दूर रहें।

यदि कोई साधु, सन्यासी, तांत्रिक एवं टोटके करने वाला व्यक्ति कोई सुपारी, लौंग, इलायची एवं पान आदि वस्तु खाने के लिए दें, तो उसका सेवन न करें, अपितु उसे बहते जल में प्रवाहित कर दें, ऐसी वस्तुओं को साथ में भी न रखें।

झाड़ू व धान कूटने वाला मूसल अस्वस्थ व्यक्ति के ऊपर से उतार कर उसके सिरहाने रख दें।

गाय के गोबर का कंडा (या उपला) व जली लकड़ी की राख को पानी से भिंगोकर एक लड्डू बनाएं और उसमें पांच रुपए का सिक्का खोंस दें। फिर उस पर काजल और रोली की सात बिंदी लगा दें। तत्पश्चात लोहे की एक कील भी उसमें घुसा दें। अब इस लड्डू को अस्वस्थ व्यक्ति के ऊपर से सात बार उतार कर चुपचाप नजदीक के किसी चौराहे पर रख आएं। आते-जाते समय किसी से बातचीत न करें तथा पीछे मुड़कर भी न देखें। इस क्रिया को करने से भूत-प्रेत से ग्रस्त व्यक्ति बहुत ही जल्दी स्वस्थ होने लगता है।

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