राहु का कुंडली में विभिन्न भावों में स्थित होने का यह होता है प्रभाव, जीवन में समस्‍याएं और सफलता होती है तय

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राहु का जीवन पर प्रभाव समझकर ही आप बाधाओं से मुक्ति पा सकते हैं। ये जीवन के तमाम ज्ञात और अज्ञात रहस्यों को खोल सकता है। राहु कुंडली के अलग-अलग खानों में बैठकर अलग-अलग प्रभाव देता है।

अलग-अलग भावों में इस प्रकार प्रभाव देता है राहु

(1) राहु लग्न ( प्रथम ) भाव में :–

राहु कुंडली के प्रथम भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति के पारिवारिक जीवन में समस्याएं आती है। व्यक्ति का पारिवारिक जीवन खराब रहता है। ऐसा इसलिए कि ऐसी दशा में व्यक्ति अपने पूर्व जन्म में अपने परिवार की कीमत नहीं समझता है और इस जन्म में भी परिवारिक जीवन के महत्व को नहीं समझता है।

अलग-अलग भावों में इस प्रकार प्रभाव देता है राहु

(1) राहु लग्न ( प्रथम ) भाव में :–

राहु कुंडली के प्रथम भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति के पारिवारिक जीवन में समस्याएं आती है। व्यक्ति का पारिवारिक जीवन खराब रहता है। ऐसा इसलिए कि ऐसी दशा में व्यक्ति अपने पूर्व जन्म में अपने परिवार की कीमत नहीं समझता है और इस जन्म में भी परिवारिक जीवन के महत्व को नहीं समझता है।

(2) राहु द्वितीय भाव में :-

राहु कुंडली के द्वितीय भाव में हो तो व्यक्ति भयग्रस्त होता है। ऐसे व्यक्तियों को अलग-अलग चीजों का भय होता है। ऐसे व्यक्तियों को हरदम ये भय सताता रहता है कि ये न हो जाए वो न हो जाए। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ऐसा व्यक्ति अपने पूर्व जन्म में अपनी शक्ति का दुरूपयोग किया हो और दुसरों को अपनी शक्ति से हानि पहुंचाई हो।

(3) राहु तृतीय ( पराक्रम ) भाव में :-

राहु कुंडली के तृतीय भाव में हो तो व्यक्ति दुस्साहसी होता है। ऐसा व्यक्ति व्यक्ति किसी से भी नहीं डरता है और खतरनाक कार्य करने में अग्रसर रहता है। ऐसे व्यक्ति किसी भिषण दुर्घटना का शिकार हो सकता है। ऐसे व्यक्तियों को तेजी से गाड़ी आदि चलाने का जुनून होता है इसलिए ऐसे व्यक्तियों के साथ या तो दुर्घटना की आंशका बनी रहती है या तो व्यक्ति दुर्घटना का शिकार हो जाता है।

(4) राहु चतुर्थ भाव में :-

राहु कुंडली के चतुर्थ भाव में हो तो व्यक्ति को कभी सुख नहीं मिलता , कारण यह है कि ऐसे व्यक्तियों ने अपने पूर्व जन्म में लोगों को दुःख दिये होते हैं इसलिए इसलिए इस जन्म में इनको दुःख झेलना पड़ता है। ऐसे व्यक्तियों को संपत्ति और परिवार का सुख नहीं मिलता और जीवन में स्थायित्व नहीं आता है।

(5) राहु पंचम भाव में :-

राहु कुंडली के पंचम भाव में हो तो संतान संबंधी परेशानी होती है। ऐसे व्यक्ति को या तो संतान होने में दिक्कत आती है या तो संतान द्वारा दिक्कत आती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ऐसे व्यक्ति ने अपने पूर्व जन्म में अपने मां बाप का सम्मान नहीं किया हो या तो ऐसे व्यक्ति ने पुर्व जन्म में अनैतिक गर्भपात कराया हो । ऐसे व्यक्तियों को या तो संतान नहीं होती या होती है तो संतान के द्वारा परेशानी होती है।

(6) राहु षष्ठ भाव में :-

राहु कुंडली के छठे भाव में हो तो ऐसा व्यक्ति खुब संपन्न होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ऐसे व्यक्ति ने अपने पूर्व जन्म में खुब धर्म – दान किया होता है। ऐसे व्यक्ति को रोग नहीं सताते हैं और धन मिलता है। ऐसे व्यक्ति को धन के लिए मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ता है।

(7) राहु सप्तम भाव में :-

राहु कुंडली के सप्तम भाव में हो तो व्यक्ति को जीवन में काफी उतार चढ़ाव का का सामना करना पड़ता है। कभी अर्श पर तो कभी फर्श पर। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ऐसे व्यक्ति अपने पूर्व जन्म में धन और संपत्ति की कीमत नहीं समझते। सप्तम भाव का राहु व्यक्ति को धनवान तो बनता है लेकिन व्यक्ति को तपाने के बाद। ऐसे व्यक्ति को पेट और छाती के संबंध में परेशानी आती है और पेट और छाती के रोग सताते हैं।

(8) राहु अष्टम भाव में :-

राहु कुंडली के अष्टम भाव में हो तो ऐसा व्यक्ति किसी विशेष उद्देश्य के लिए जन्म लेता है जो उद्देश्य पुर्व जन्म में बाकी रह गया था। अष्टम भाव में राहु के होने पर जन्म और मृत्यु आकस्मिक होते हैं। व्यक्ति जिस उद्देश्य के लिए जन्म लेता है वो उद्देश्य पूरा होते ही व्यक्ति वापस लौट जाता है उसका देहवासन हो जाता है। अष्टम भाव का राहु यह दर्शाता है कि पुर्व जन्म में ऐसे कोई कर्म का इन्होंने संकल्प लिया होता है और वो पूरा नहीं होता उसी कर्म को करने के लिए व्यक्ति का जन्म होता है।

(9) राहु कुंडली के नवम भाव में हो तो व्यक्ति धर्म भ्रष्ट होता है । ऐसे व्यक्ति को भाग्य साथ नहीं देता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ऐसे व्यक्ति ने पुर्व जन्म में धर्म का पालन नहीं किया हो और दुसरे व्यक्तियों के लिए समस्या पैदा की हो तो इस जन्म में भाग्य इनका साथ नहीं देता है।

(10) राहु दशम (कर्म) भाव में :-

राहु कुंडली के दशम भाव में हो तो व्यक्ति ऊंचाइयों पर पहुंचता है। लेकिन परिवारिक सुख नहीं मिलता है। विवाह नहीं होता है अगर हो जाए तो तलाक हो जाता है यानि कि परिवारिक सुख नहीं मिलता है। लेकिन मान – प्रतिष्ठा मिलती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पिछले जन्म में इन लोगों ने पद – प्रतिष्ठा की कामना की होती है। जो इस जन्म में इन्हें मिल जाती है।

(11) राहु कुंडली के एकादश भाव में :-

एकादश भाव का राहु व्यक्ति को वैराग्य की तरफ ले जाता है। ऐसे लोग महाज्ञानी ,संत , महात्मा बन जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पिछले जन्म में इन्होंने ने संकल्प लिया होता है कि वह व्यक्तियों के कष्टों को दूर करेंगे। इसलिए एकादश भाव में राहु बैठकर व्यक्ति को वैराग्य दिलाता हैं ताकि उनका संकल्प पूरा हो।

(12) राहु द्वादश भाव में :-

द्वादश भाव का राहु व्यक्ति को दुर्गुण तथा कुमार्ग पर ले जाता है व्यक्ति गलत रास्ते पर चला जाता है। ये संस्कार इनको पूर्वजन्‍म के कर्मों से ही मिलते हैं। यानि कि अगर व्यक्ति अगर पिछले जन्म में खुब शराब पीता था तो ऐसाव्यक्ति इस जन्म में भी खुब शराब पीयेगा । अगर व्यक्ति पिछले जन्म में शराबी था तो इस जन्म में भी शराबी होता है। द्वादश भाव का राहु कभी कभी जेल यात्रा भी करा देता है। आप सभी को जानकारी फिर से दे रहा हूं क्योंकि मित्रों जिसके कुंडली में राहुल चतुर्थ भाव षष्टम भाव अष्टम भाव दशम भाव या द्वादश भाव इस भाव में होता है इन सभी भाइयों को सिर्फ 12 वहां राहु कंट्रोल करता है उसको अच्छा या बुरा फल देता है क्योंकि सभी की दृष्टि ₹12 पड़ती है तो वैसे ही फल देता है फिर आप कितने भी चाहे उपाय कर लो इतनी सारी पूजाई कर लो यह मंदिर में जाकर बैठो फिर भी यह काम नहीं करेगा इसके लिए अच्छे से राहुकी उपाय करनी चाहिए तभी आपका जीवन अच्छा सुख में होता है और मेरा यही प्रयास रहता है कि आपके कुंडली के अंदर या आपके जीवन के अंदर राहु कैसे अच्छे स्थिति में लाया जाए यही मेरा प्रयास रहता है।

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