महामृत्युंजय मंत्र से व्यक्ति को क्या लाभ मिलता है

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इसके पीछे सिर्फ धर्म नहीं है, इसके पीछे पूरा स्वर सिद्धांत है। इसे संगीत का विज्ञान भी कहा जाता है। महामृत्युंजय मंत्र की शुरुआत ऊँ अक्षर से होती है। इसका लंबे स्वर और गहरी सांस के साथ उच्चारण किया जाता है। इसी तरह पूरे मंत्र को पढ़ा जाता है। बार-बार दोहराया जाता है। इससे शरीर में मौजूद सूर्य और चंद्र नाड़ियों में कंपन उत्पन्न होता है। हमारे शरीर में मौजूद सप्तचक्रों के आसपास एनर्जी का संचार होता है। ये संचार ही मंत्र पढ़ने वाले और सुनने वाले के शरीर पर भी होता है। नाड़ियों और चक्रों में जो ऊर्जा का संचार होता है। इन चक्रों के कंपन से शरीर में शक्ति आती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इस तरह लंबे स्वर और गहरी सांस के साथ जाप करने से बीमारियों से जल्दी मुक्ति मिलती है।

इस तरह किया जाता है महामृत्युंजय का जाप

रोज रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र के 108 जप करने से अकाल मृत्यु (असमय मौत) का डर दूर होता है। साथ ही कुंडली के दूसरे बुरे रोग भी शांत होते हैं, इसके अलावा 8 तरह के दोषों का नाश करके, सुख भी इस मंत्र के जाप से मिलते हैं।

महामृत्युंजय मंत्र

ऊँ त्र्यंबकम् यजामहे सुगन्धिम् पुष्टिवर्द्धनम्,

ऊर्वारुकमिव बन्धनात, मृत्योर्मुक्षियमामृतात्।।

महामृत्युंजय मंत्र के जाप में रखें ये सावधानिया

कुंडली के इन दोषों का करता है नाश

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